Cold Press Technique परिभाषा:-
आज हर चीज़ मशीनों से बनती है। हाई स्पीड (High Speed) उपकरण हर जगह हैं। लेकिन एक तकनीक हज़ारों सालों से अपनी पहचान बनाए हुए है। इसका नाम है कोल्ड प्रेस तकनीक।
कोल्ड प्रेस का मतलब है बिना गर्मी (Heat) के दबाव (Pressure) डालना। इससे तेल, रस या पेस्ट (Paste) निकलता है, या चीज़ें पीसी जाती हैं। मशीन या उपकरण धीमी गति से चलाया जाता है, जिससे घर्षण (Friction) से ज़्यादा गर्मी नहीं बनती। इसमें केमिकल (Chemical) का इस्तेमाल भी नहीं होता।
यह तकनीक तेल निकालने के लिए जानी जाती है। मसाले पीसने और अनाज पीसने में भी इसका इस्तेमाल होता है। यह पारंपरिक (Traditional) भारतीय रसोई का हिस्सा रही है।
Cold Press Technique कैसे काम करता
कोल्ड प्रेस तकनीक का सिद्धांत (Principle) सीधा है। बीज, मसाले या अनाज पर धीरे-धीरे दबाव डाला जाता है। इससे तेल, रस या पोषक तत्व (Nutrients) बाहर निकल आते हैं।
इसके पीछे विज्ञान (Science) यह है -
तापमान नियंत्रण: तेज़ मशीनों में घर्षण से तापमान 60 से 70 डिग्री तक पहुँच जाता है। इससे पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं। कोल्ड प्रेस में तापमान 40 डिग्री से नीचे रहता है।
धीमी गति: मशीन या पत्थर धीरे घूमता है। दबाव पूरा पड़ता है, पर गर्मी नहीं बनती।
प्राकृतिक संरचना सुरक्षित रहना: गर्मी और केमिकल नहीं होने से असली स्वाद, सुगंध (Aroma) और पोषक तत्व बने रहते हैं।
कोल्ड प्रेस कैसे किया जाता है (Process)
कोल्ड प्रेस प्रक्रिया दो तरीकों से होती है।
पहला तरीका है यांत्रिक दबाव (Mechanical Pressing)। इसमें बीज या मसाले को धीमी गति वाली चक्की में डाला जाता है। दबाव से तेल या पेस्ट निकलता है।
दूसरा तरीका है पारंपरिक पत्थर आधारित तरीका (Stone Grinding Method)। इसमें सिलबट्टा, इमामदस्ता या चक्की जैसे पत्थर के उपकरण इस्तेमाल होते हैं। यह तरीका सदियों से भारतीय रसोई (Kitchen) में चल रहा है।
कोल्ड प्रेस के पारंपरिक भारतीय उदाहरण (Traditional Indian Examples)
भारत में कोल्ड प्रेस तकनीक सिर्फ तेल तक सीमित नहीं रही। रोज़मर्रा की रसोई में भी यह तरीका अपनाया जाता रहा है।
पानी की चक्की से आटा पीसना: गांवों में आज भी पानी की चक्की से गेहूं पीसा जाता है। यह प्रक्रिया धीमी होती है। इससे आटे में फाइबर (Fiber) और पोषक तत्व सुरक्षित रहते हैं।
सिलबट्टे से मसाला पीसना: सिलबट्टा एक सपाट पत्थर और बेलनाकार (Cylindrical) पत्थर का जोड़ा होता है। इससे हाथ से दबाव डालकर मसाला पीसा जाता है। मसालों का तेल और सुगंध बनी रहती है। मिक्सी में पीसने पर यह अक्सर खत्म हो जाती है।
इमामदस्ते से अदरक-लहसुन का पेस्ट बनाना: इमामदस्ता एक छोटा पत्थर का बर्तन और मूसल (Pestle) होता है। इसमें अदरक-लहसुन कूटकर पेस्ट बनाया जाता है। इससे असली रस और तीखापन बना रहता है।
भीगी हुई दालों को सिलबट्टे पर पीसना: इडली, डोसा या पकोड़े के लिए दालें पहले भिगोई जाती हैं। फिर सिलबट्टे पर पीसी जाती हैं। यह प्रक्रिया धीमी होती है। इससे दाल का असली स्वाद और पोषण बना रहता है।
मिक्सी का इस्तेमाल न करना: पारंपरिक तरीके में मिक्सी से दूरी रखी जाती है। इसके तेज़ ब्लेड (Blade) घर्षण से गर्मी पैदा करते हैं। इससे मसालों और दालों का असली तेल और पोषण कम हो जाता है।
इन सभी तरीकों में एक बात समान है। धीमी गति, हाथ से नियंत्रित दबाव, और बिना अतिरिक्त गर्मी के काम पूरा करना। यही असली कोल्ड प्रेस का सार (Essence) है।
प्राचीन भारत में कोल्ड प्रेस तकनीक (Cold Press in Ancient India)
भारत में कोल्ड प्रेस का इतिहास हज़ारों साल पुराना है। प्राचीन काल में तेल निकालने के लिए घानी (Ghani) नाम का लकड़ी का उपकरण इस्तेमाल होता था। इसे बैल या हाथ से धीरे-धीरे घुमाया जाता था। आज भी इसे "कच्ची घानी तेल" कहा जाता है। असल में यह कोल्ड प्रेस तेल ही है।
आयुर्वेद (Ayurveda) में भी इस तकनीक का महत्व बताया गया है। आयुर्वेदिक ग्रंथों में तिल, सरसों, नारियल और बादाम से धीमी गति में तेल निकालने की विधि मिलती है। माना जाता था कि गर्मी से तेल के औषधीय गुण (Medicinal Properties) नष्ट हो जाते हैं। यही सोच आज के कोल्ड प्रेस तेल उद्योग की नींव है।
कोल्ड प्रेस का महत्व और उपयोग (Importance and Uses)
नारियल तेल (Coconut Oil): कोल्ड प्रेस नारियल तेल में प्राकृतिक सुगंध और पोषक तत्व बने रहते हैं। यह त्वचा (Skin), बाल और खाना पकाने तीनों के लिए फायदेमंद है।
मसाला तेल और पेस्ट: सिलबट्टे और इमामदस्ते से बने मसाले के पेस्ट में तेल अलग नहीं होता। इससे खाने का स्वाद गहरा (Rich) बना रहता है।
सरसों और तिल का तेल: पारंपरिक घानी से निकाला तेल आज भी उत्तर भारत में सबसे पसंदीदा है।
जैतून तेल (Olive Oil): विदेशों में कोल्ड प्रेस्ड ऑलिव ऑयल को सेहत के लिए सबसे शुद्ध माना जाता है।
बादाम और अन्य ड्राई फ्रूट ऑयल: स्किनकेयर (Skincare) और सेहत दोनों के लिए इनका कोल्ड प्रेस्ड रूप ज़्यादा असरदार माना जाता है।
कोल्ड प्रेस Cold Press आधुनिक तकनीकों से बेहतर क्यों है
पोषक तत्व सुरक्षित रहते हैं: तेज़ गर्मी और हाई स्पीड मशीनों से पोषक तत्व, विटामिन (Vitamins) और एंजाइम (Enzymes) नष्ट हो जाते हैं। कोल्ड प्रेस में यह बने रहते हैं।
असली स्वाद और सुगंध: मिक्सी या तेज़ मशीन से पीसने पर मसालों की सुगंध उड़ जाती है। सिलबट्टे या इमामदस्ते से पीसने पर यह बरकरार रहती है।
केमिकल फ्री प्रक्रिया: आधुनिक रिफाइनिंग (Refining) में अक्सर केमिकल इस्तेमाल होता है। कोल्ड प्रेस पूरी तरह प्राकृतिक होता है।
स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद: कम गर्मी से तेल में फैटी एसिड (Fatty Acids) और एंटीऑक्सीडेंट (Antioxidants) सुरक्षित रहते हैं। यह दिल और त्वचा की सेहत के लिए अच्छे होते हैं।
टिकाऊ और पर्यावरण के अनुकूल: कोल्ड प्रेस में बिजली की खपत कम होती है। यह पर्यावरण (Environment) के लिए acha
Modern refining में उच्च तापमान और chemical solvents इस्तेमाल होते हैं, जिससे उत्पादन बढ़ता है पर पोषक तत्व लगभग खत्म हो जाते हैं। बीजों के प्राकृतिक गुण 60-70°C पर ही नष्ट होने लगते हैं, जबकि refined oils में तापमान इससे कहीं ज्यादा रहता है। इसीलिए स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोग फिर से Cold Press तेलों की ओर लौट रहे हैं।
कोल्ड प्रेस Cold Press Technique सिर्फ एक प्रक्रिया नहीं है। यह भारत की पारंपरिक सोच और विज्ञान का मिश्रण है।
Nice
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